मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर, रतलाम और राजस्थान के चित्तौड़गढ़, झालावाड़, कोटा, बारां व भीलवाड़ा अंचल के लाखों अफीम काश्तकारों का महीनों लंबा इंतजार खत्म हो गया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने फसल वर्ष 2026-27 (1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027) के लिए नई अफीम नीति का आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) जारी कर दिया है।
⚡ मुख्य फैसला: इस वर्ष पारंपरिक चीरा पद्धति (Lancing / Gum Opium) के तहत लाइसेंस नवीनीकरण के लिए न्यूनतम अर्हक उपज (MQY-M) 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मॉर्फिन तय की गई है। वहीं आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए इसे बढ़ाकर 5.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने की अग्रिम वैधानिक चेतावनी (Forewarning) जारी कर दी गई है।
1. नई अफीम नीति 2026-27 के 5 सबसे बड़े नियम व प्रावधान
राजपत्र में अधिसूचित नियमों के अनुसार, इस वर्ष पट्टा आवंटन के प्रमुख मानदंड निम्नलिखित हैं:
- चीरा पद्धति (गम अफीम) की पात्रता: जिन काश्तकारों ने फसल वर्ष 2025-26 के दौरान अफीम की खेती की थी और सरकारी तौल केंद्र व नीमच/गाजीपुर ओपियम फैक्ट्री विश्लेषण में जिनका न्यूनतम मॉर्फिन औसत 4.4 kg/हेक्टेयर या उससे अधिक रहा, वे चीरा लगाने के पात्र होंगे।
- मानक पट्टा क्षेत्रफल (10 आरी): प्रत्येक पात्र कृषक को 0.10 हेक्टेयर (10 आरी) का मानक लाइसेंस क्षेत्रफल आवंटित किया जाएगा।
- एक ही प्लॉट में बुवाई की अनिवार्यता: अफीम का पूरा 10 आरी का पट्टा एक ही भूखंड (Single Contiguous Plot) में बोना होगा। प्लॉट को टुकड़ों में बांटने की अनुमति नहीं होगी।
- लीज (अनुबंध) पर जमीन लेने की छूट: यदि किसी पात्र किसान के पास खुद के नाम पर 10 आरी जमीन नहीं है, तो वह उसी राजस्व गांव या निकटवर्ती सीमावर्ती गांव के किसी अन्य किसान से विधिवत पंजीकृत लीज/सहमति अनुबंध पर जमीन लेकर 10 आरी का भूखंड पूरा कर सकता है।
- सीपीएस (CPS - बिना चीरा) पद्धति विस्तार: जो किसान मॉर्फिन औसत या पूर्व शर्तों के कारण चीरा पद्धति से बाहर हुए हैं, उन्हें कंसंट्रेट ऑफ पॉपी स्ट्रॉ (CPS Method) के तहत बिना चीरा लगाए डोडा-चूरा उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं।
2. चीरा पद्धति बनाम सीपीएस (CPS) पद्धति: दोनों में क्या अंतर है?
कई किसान भाई चीरा और सीपीएस में भ्रमित रहते हैं। नीचे दी गई तालिका से दोनों का अंतर स्पष्ट समझें:
| तुलनात्मक बिंदु | पारंपरिक चीरा पद्धति (Lancing Gum) | सीपीएस पद्धति (CPS Straw) |
|---|---|---|
| फसल प्रक्रिया | डोडों पर चीरा लगाकर अफीम दूध (गम) निकाला जाता है | चीरा लगाना सख्त मना; साबुत डोडा फैक्ट्री को दिया जाता है |
| आवश्यक मॉर्फिन औसत | न्यूनतम 4.4 kg/हेक्टेयर (2025-26 के आधार पर) | चीरा अपात्र या मार्फिन कम वाले कृषकों को राहत |
| खसखस (पोस्ता दाना) | किसान दाना निकाल कर मंडी में बेच सकता है | नियमों के तहत नियंत्रित तुड़ाई व सरकारी निगरानी |
| मंडी लिंक व भाव | नीमच व मंदसौर मंडी में पोस्तादाना ₹1.20L+ क्विंटल | सीधा सरकारी मूल्य भुगतान बैंक खाते में |
3. किसान की मृत्यु होने पर वारिस (Nominee) के नाम पट्टा कैसे ट्रांसफर कराएं?
यदि मूल पट्टाधारक किसान का देहावसान हो गया है, तो पट्टा लैप्स नहीं होता। नारकोटिक्स नियमों के तहत वारिस के नाम स्थानांतरण की प्रक्रिया:
- परिवार का सहमति पत्र (NOC): यदि परिवार में कई कानूनी वारिस हैं, तो अन्य सभी वारिसों द्वारा 100 रुपये के स्टाम्प पर नामांकित वारिस (पत्नी या पुत्र) के पक्ष में नोटरीकृत अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) बनवाना होगा।
- मृत्यु प्रमाण पत्र व राजस्व खतौनी: ग्राम पंचायत या नगर पालिका द्वारा जारी मूल मृत्यु प्रमाण पत्र और चालू वर्ष की भू-अभिलेख खसरा नकल संलग्न करें।
- जिला अफीम अधिकारी (DTO) को आवेदन: संबंधित नारकोटिक्स खंड (Division I, II या III) के जिला अफीम अधिकारी कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र पर स्थानांतरण आवेदन प्रस्तुत करें। जांच उपरांत पट्टा नामित वारिस के नाम दर्ज कर दिया जाता है।
4. CBN पोर्टल पर पात्र व अपात्र सूची (Eligible List) कैसे चेक करें?
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सभी प्रभागों की खंडवार सूची आधिकारिक पोर्टल cbn.nic.in पर अपलोड की जा रही है। सूची देखने का चरणबद्ध तरीका:
- आधिकारिक वेबसाइट
cbn.nic.inपर जाएं और 'Opium Cultivation' टैब पर क्लिक करें। - अपने राज्य (जैसे Madhya Pradesh या Rajasthan) और अपने खंड (जैसे Neemuch-I, Mandsaur-II, Chittorgarh आदि) का चयन करें।
- ग्रामवार सूची डाउनलोड करें और अपने पिता का नाम, खाता संख्या व पिछले वर्ष का मॉर्फिन औसत चेक करें।
- यदि आपका नाम अपात्र सूची में है या मॉर्फिन औसत में कोई विसंगति है, तो सूची प्रकाशन के 15 दिनों के भीतर अपील दर्ज कराएं।
🚨 2027-28 के लिए अत्यंत जरूरी चेतावनी:
सरकार ने राजपत्र में स्पष्ट कर दिया है कि अगले फसल वर्ष 2027-28 में चीरा लगाने का पट्टा केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो इस साल न्यूनतम 5.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मॉर्फिन जमा कराएंगे। इसलिए बुवाई से लेकर चीरा लगाने और दूध सुखाने तक वैज्ञानिक प्रबंधन करें—दूध में पानी की मिलावट या अत्यधिक नमी से मॉर्फिन टेस्ट फेल हो जाता है और पट्टा हमेशा के लिए छिन सकता है।


