गेहूं की बुवाई का मौसम आते ही उत्तर भारत और मध्य भारत के खेतों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य ₹2,585 प्रति क्विंटल तय करने से किसानों में भारी उत्साह है। इस बार किसान ऐसी किस्मों की तलाश में हैं जो मार्च की अवांछित गर्मी (टर्मिनल हीट) को झेल सकें और प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल की बंपर पैदावार दें।
इस दौड़ में दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं: भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल द्वारा विकसित DBW 327 (करण शिवानी) और निजी क्षेत्र की सर्वाधिक लोकप्रिय रिसर्च वैरायटी श्रीराम सुपर 303 (Shriram Super 303)।
DBW 327 बनाम श्रीराम सुपर 303: कौन किस पर भारी?
दोनों किस्मों की खूबियां और उपयुक्त क्षेत्र इस प्रकार हैं:
| विशेषता | DBW 327 (करण शिवानी) | श्रीराम सुपर 303 |
|---|---|---|
| सर्वोत्तम बुवाई समय | 25 अक्टूबर से 5 नवंबर (अगेती बुवाई) | 1 नवंबर से 25 नवंबर (समय पर व पिछेती) |
| फसल अवधि | 150 से 155 दिन | 125 से 135 दिन |
| कल्लों की संख्या (Tillers) | 10 से 12 कल्ले प्रति पौधा | 12 से 16 कल्ले (अत्यधिक फुटाव) |
| औसत पैदावार | 26 से 28 क्विंटल / एकड़ | 24 से 27 क्विंटल / एकड़ |
| अधिकतम क्षमता | 35 क्विंटल / एकड़ (87 क्विंटल/हेक्टेयर) | 30 क्विंटल / एकड़ |
| रोग प्रतिरोधक क्षमता | पीला रतुआ (Yellow Rust) के प्रति 100% सुरक्षित | भूरा व पीला रतुआ के प्रति सहनशील |
| तना मजबूती (गिरने से बचाव) | मजबूत तना, तेज हवा में गिरती नहीं | मध्यम ऊंचाई, संतुलित पानी जरूरी |
पलेवा का नियम: सूखे में बुवाई करने से क्यों बचें?
कई किसान समय बचाने के चक्कर में सूखे खेत में सिड्रिल चलाकर पीछे से पानी छोड़ देते हैं। इसे "कोर बुवाई" कहते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इससे 3 भारी नुकसान होते हैं:
- मिट्टी की पपड़ी जमना: पानी सूखने पर मिट्टी पर कड़ी पपड़ी जम जाती है जिससे लगभग 30% गेहूं की सुइयां (Sprouts) बाहर नहीं निकल पातीं।
- खरपतवार का प्रकोप: पलेवा करने पर सारा खरपतवार पहले ही उग जाता है, जिसे रोटावेटर चलाकर नष्ट कर दिया जाता है। सूखे में बोने पर खरपतवार गेहूं से पहले उगता है।
- पलेवा का सही तरीका: खेत में गहरा पानी लगाएं। 6 से 8 दिन बाद जब मिट्टी "ओट" पर आ जाए (पैर न धंसे और मिट्टी लड्डू बनकर बिखर जाए), तब 2 बार कल्टीवेटर और 1 बार पाटा लगाकर बीज डालें।
पहली सिंचाई का नियम (CRI Stage - 20 से 22 दिन)
गेहूं की जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बुवाई के 21 दिन बाद आता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में क्राउन रूट इनिशिएशन (CRI / चंदेड़ी अवस्था) कहते हैं।
इस समय पौधे के तने के आधार से मुख्य स्थाई जड़ें फूटती हैं। यदि आपने इस समय सिंचाई में 5 दिन की भी देरी कर दी, तो कल्ले (Tillers) बनना बंद हो जाते हैं और गेहूं की बालियां छोटी रह जाती हैं। पहली सिंचाई हमेशा हल्की करें और सिंचाई के 2 दिन बाद 45 किलो यूरिया + 5 किलो जिंक सल्फेट 33% का छिड़काव प्रति एकड़ जरूर करें।


