मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर, रतलाम और राजस्थान के कोटा-प्रतापगढ़ बेल्ट में इस समय किसान रबी की सबसे नकदी फसल लहसुन की तैयारियों में जुटे हैं। पिछले दो सीजनों में जिस तरह से लहसुन के थोक भाव ₹15,000 से लेकर ₹25,000 प्रति क्विंटल तक पहुंचे, उसने किसानों का रुझान पारंपरिक देशी लहसुन से हटाकर ऊटी (Ooty-1) की तरफ तेजी से बढ़ाया है।
लेकिन ऊटी लहसुन की सबसे बड़ी खासियत और कमजोरी दोनों इसका समय है—यह मात्र 110 से 120 दिन में पककर तैयार हो जाता है, पर इसका भंडारण 2 से 3 महीने से ज्यादा नहीं किया जा सकता। यानी अगर आपकी फसल सही समय पर मंडी में नहीं पहुंची या कंद का पर्दा कमजोर रहा, तो मुनाफा सीधे आधा रह जाता है।
ऊटी बनाम G-2 (रियावन): अपने खेत के हिसाब से क्या चुनें?
बुवाई से पहले यह तय करना जरूरी है कि आपका उद्देश्य क्या है:
| पहलू | ऊटी-1 (Ooty) | G-2 / रियावन देशी |
|---|---|---|
| पकने की अवधि | 110 से 120 दिन (अगेती फसल) | 135 से 150 दिन |
| कंद का आकार | 55mm से 75mm (मोटा बोल्ड) | मध्यम, ठोस व तीखा |
| भंडारण (Storage) | कम (2-3 माह में बेचना जरूरी) | 6 से 9 माह तक सुरक्षित |
| सर्वोत्तम मंडी रणनीति | जनवरी-फरवरी की पहली अगेती आवक में बेचें | बरसात के मौसम में जब भाव चरम पर हों तब निकालें |
जमीन तैयार करते समय क्या डालें?
लहसुन जड़ वाली फसल है, इसलिए मिट्टी का भुरभुरा होना सबसे पहली शर्त है। भारी काली मिट्टी में अगर पानी ठहरता है तो ऊटी लहसुन में जड़ सड़न (Root Rot) की शिकायत बहुत जल्दी आती है। प्रति एकड़ खेत में बुवाई से पहले:
- सड़ी हुई गोबर खाद: 4 से 5 ट्रॉली (कच्ची खाद बिल्कुल न डालें, इससे दीमक और फंगस आती है)
- DAP (18:46:0): 50 किलो प्रति एकड़
- पोटाश (MOP 60%): 35 किलो (कंद का वजन इसी से बनता है)
- बेंटोनाइट सल्फर 90%: 15 किलो (लहसुन में तीखापन और चमक लाने के लिए जरूरी)
कंद फुलाने का सटीक स्प्रे चक्र (75 से 95 दिन)
जब फसल 75 दिन पार कर जाती है, तो पौधे को यूरिया की नहीं बल्कि फास्फोरस और पोटाश की जरूरत होती है। इस समय यूरिया डालने पर पौधा ऊपर से बढ़ जाता है लेकिन नीचे कंद छोटा रह जाता है।
पहला स्प्रे (75-80 दिन पर):
NPK 0:52:34 (1 किलो) के साथ 20% बोरॉन (250 ग्राम) को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़कें। बोरॉन से लहसुन की कलियां फटती नहीं हैं और कंद सख्त बनता है।
दूसरा स्प्रे (90-95 दिन पर):
NPK 0:0:50 (1 किलो प्रति एकड़)। यह कंद के बाहरी छिलके पर कड़क सफेद पर्दा चढ़ाता है, जो नीमच मंडी में व्यापारी सबसे पहले चेक करते हैं।
मंडी में जाने से पहले ये 3 गलतियां न करें
मंडी में बोली लगाने वाले व्यापारी बताते हैं कि किसान की 4 महीने की मेहनत सिर्फ आखिरी 10 दिनों की लापरवाही से खराब होती है:
1. कटाई से 12 दिन पहले पानी बंद करें: अगर गीली जमीन में से लहसुन उखाड़ा, तो मिट्टी छिलके पर चिपक जाएगी और पर्दा काला पड़ जाएगा। सूखे खेत से निकला माल एकदम दूधिया सफेद रहता है।
2. तेज धूप में सीधे न सुखाएं: खेत में उखाड़ने के बाद लहसुन को एक-दूसरे के पत्तों से ढककर रखें ताकि कलियों पर सीधी धूप न लगे। सीधी धूप से लहसुन पीला पड़ जाता है।
3. मिक्स माल न भरें: लड्डू माल और छंटनी माल को कभी एक बोरी में न मिलाएं। अगर बोरी में 10% भी छोटा माल निकला, तो व्यापारी पूरी बोरी का भाव छोटे माल के हिसाब से लगाता है।


