भारत की प्रमुख रबी दलहन फसल चना (Bengal Gram) के बाजार भाव इस वर्ष देश की मंडियों (विदिशा, बीकानेर, इंदौर, लातूर और अकोला) में ₹6,500 से ₹7,300 प्रति क्विंटल के बेहद आकर्षक स्तर पर बने हुए हैं। ऊंचे बाजार भाव और कम पानी की आवश्यकता के कारण इस रबी सीजन (25 अक्टूबर से 20 नवंबर) में चने के रकबे में बड़ा उछाल आ रहा है। लेकिन चने से 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ की रिकॉर्ड पैदावार लेने के लिए सही उकठा-रोधी किस्म (Wilt Resistant Variety) का चयन और वैज्ञानिक बीजोपचार सबसे निर्णायक कदम है।
🎯 चना बुवाई 2026 के 3 स्वर्णिम नियम:
1. बुवाई का सर्वोत्तम समय: असिंचित (बारानी) क्षेत्रों में 25 अक्टूबर तक और सिंचित क्षेत्रों में 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच बुवाई पूरी करें।
2. कतार से कतार की दूरी: देसी चने में 30x10 सेमी और काबुली/डॉलर चने में 45x10 सेमी रखें; बीज की गहराई 8 से 10 सेमी रखें ताकि ऊपरी नमी सूखने पर भी जड़ सुरक्षित रहे।
3. DAP की जगह SSP का जादू: चने में सल्फर और कैल्शियम की पूर्ति के लिए 3 बैग SSP + 15 किलो यूरिया प्रति एकड़ सर्वोत्तम है।
🏆 1. चने की 5 सर्वश्रेष्ठ उन्नत किस्में (2026-27 तुलना सारणी)
| किस्म का नाम (Variety) | पकने की अवधि | बीज दर (प्रति एकड़) | औसत व अधिकतम पैदावार | सबसे बड़ी विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1. RVG 202 (राज विजय 202) | 100 – 105 दिन | 32 – 35 किलो | 10 से 13 क्विंटल/एकड़ | पछेती बुवाई व कम पानी में भी बंपर फलन, उकठा प्रतिरोधी (MP/RJ/UP में नं. 1) |
| 2. फूले विक्रम (Phule Vikram) | 105 – 110 दिन | 30 – 32 किलो | 12 से 16 क्विंटल/एकड़ | सीधा बढ़ने वाला पौधा (2 फीट ऊंचा) — कंबाइन हार्वेस्टर से सीधी कटाई के लिए बेस्ट! |
| 3. जाकी 9218 (JAKI 9218) | 105 – 110 दिन | 35 – 38 किलो | 10 से 12 क्विंटल/एकड़ | बोल्ड और चमकदार दाना, मंडी में कांटा भाव से ₹150 ऊपर बिकता है |
| 4. पूसा 3043 (BG 3043) / JG 16 | 105 – 112 दिन | 30 – 32 किलो | 11 से 13 क्विंटल/एकड़ | सूखा सहनशील व शुष्क जड़ गलन (Dry Root Rot) के प्रति उच्च प्रतिरोधक |
| 5. RVKG 101 / डॉलर चना (काबुली) | 115 – 120 दिन | 45 – 50 किलो | 8 से 10 क्विंटल/एकड़ | सफेद बड़ा दाना, इंदौर व उज्जैन मंडी में ₹11,000 से ₹14,000/क्विंटल निर्यात भाव |
🛡️ 2. उकठा रोग (Fusarium Wilt) और जड़ गलन से 100% बचाव का 'F-I-R' फॉर्मूला
चने में 30 से 50 दिन की अवस्था पर पौधे अचानक ऊपर से नीचे तक पीले पड़कर सूखने लगते हैं और जड़ को चीरकर देखने पर अंदर काली धारी दिखती है—इसे उकठा रोग (Wilt) कहते हैं। एक बार खड़ी फसल में आने के बाद इसे रोकना कठिन होता है, लेकिन बुवाई से पहले मात्र ₹120 प्रति एकड़ के F-I-R बीजोपचार (Seed Treatment) से इसे 100% रोका जा सकता है:
- चरण 1 — F (Fungicide / कवकनाशी): सबसे पहले प्रति किलो बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब (SAAF) या 1.5 ग्राम टेबुकोनाजोल (Raxil Easy) से उपचारित कर छांव में 30 मिनट सुखाएं।
- चरण 2 — I (Insecticide / कीटनाशी): जिन खेतों में दीमक (Termite) या कटुआ इल्ली की समस्या है, वहां इसके 30 मिनट बाद 4 मिली क्लोरपायरीफॉस 20 EC या 2 मिली थायोमेथोक्साम (Cruiser) प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
- चरण 3 — R (Rhizobium + Trichoderma / जैविक टीका): बुवाई से ठीक 1 घंटा पहले 5 ग्राम राइजोबियम (Rhizobium) + 5 ग्राम पीएसबी (PSB) + 6 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी (Trichoderma viride) प्रति किलो बीज की दर से गुड़ के ठंडे घोल के साथ मिलाकर छांव में सुखाएं और तुरंत बुवाई कर दें। इससे चने की जड़ों में गुलाबी गठानें (Nodules) दोगुनी बनती हैं जो हवा से 25 किलो नाइट्रोजन मुफ्त खींचती हैं!
✂️ 3. 35 दिन पर 'खुंटाई (Nipping)' से कैसे बढ़ती है 2 से 3 क्विंटल पैदावार?
जब चने की फसल 30 से 40 दिन की हो जाए (फूल आने से पहले) और पौधे की ऊंचाई 6 से 8 इंच हो, तब ऊपर की कोमल कोपलों (Top Shoot) को 1-2 इंच तोड़ देने की प्रक्रिया को खुंटाई या निपिंग (Nipping) कहते हैं।
- ऊपरी कोपल टूटने से पौधे में 'एपिकल डोमिनेंस' समाप्त हो जाता है और बगल से 8 से 12 नई फुटाव शाखाएं (Lateral Branches) निकलती हैं। जितनी अधिक शाखाएं होंगी, उतनी ही अधिक फलियां (घेटी) लगेंगी!
- बिना मजदूर के रासायनिक खुंटाई: यदि बड़े रकबे में हाथ से खुंटाई संभव न हो, तो बुवाई के 35वें दिन TIBA (Tri-iodobenzoic acid) 75 ppm (7.5 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी) या मेपिक्वाट क्लोराइड (Chamatkar) 150 मिली प्रति एकड़ का हल्का स्प्रे करें—यह पौधे की अनावश्यक बढ़वार रोककर शाखाओं का जबरदस्त फुटाव कराता है।


