पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार की अनाज मंडियों में खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के तहत धान (Paddy) की सरकारी खरीद पूरे शबाब पर है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,300 प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का ₹2,320 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। लेकिन मंडियों में सबसे बड़ा विवाद 17% नमी (Moisture) के नियम और कांटा पर्ची में लगने वाले अवैध कट्स को लेकर हो रहा है।
⚖️ कानूनी स्थिति: भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि आपके धान में नमी 17% या उससे कम है, तो खरीद एजेंसी या आढ़ती ₹1 की भी कटौती नहीं कर सकता। यदि नमी 17% से 19% के बीच है, तो केवल निर्धारित वजन तालिका के अनुसार वजन में कटौती हो सकती है—भाव में ₹150-₹250 प्रति क्विंटल की नकद कटौती करना कानूनन जुर्म है!
1. 17% नमी का सरकारी स्लैब और वैध वजन कटौती का नियम
मंडी में धान तौलते समय आपको यह तालिका अच्छी तरह याद होनी चाहिए ताकि कोई भी खरीद निरीक्षक या दलाल आपके साथ हेराफेरी न कर सके:
| नमी का स्तर (%) | सरकारी पात्रता | मान्य वजन कटौती (प्रति क्विंटल) | क्या नकद भाव कटेगा? |
|---|---|---|---|
| 14% से 17.0% | 100% पूर्ण पात्र | शून्य (0 किलो) | कोई कटौती नहीं (पूरा ₹2,320) |
| 17.1% से 18.0% | सशर्त स्वीकृति | लगभग 1.0 से 1.25 किलो वजन | केवल वजन कटेगा, भाव नहीं कट सकता |
| 18.1% से 19.0% | सुखाने की सलाह | लगभग 2.0 से 2.50 किलो वजन | सुखाने के बाद सरकारी खरीद पर मान्य |
| 19% से अधिक | अस्वीकृत (Rejected) | - | सरकारी कांटे पर तौल नहीं हो सकती |
2. खेत पर 12 घंटे में नमी 2 से 3% कम करने का व्यावहारिक तरीका
यदि आप कम्बाईन से धान कटवा रहे हैं, तो सुबह की ओस सूखने से पहले कटाई न कराएं। यदि धान में नमी 19-20% आ रही है, तो मंडी ले जाकर विवाद करने से बेहतर है कि यह 12 घंटे का वैज्ञानिक सुखाने का तरीका अपनाएं:
- तिरपाल पर 3-4 इंच परत: धान को पक्के फर्श या प्लास्टिक तिरपाल पर 3 से 4 इंच से ज्यादा मोटा न फैलाएं। ज्यादा मोटी ढेरी लगाने पर नीचे का दाना गीला रह जाता है।
- दोपहर 11 से 3 बजे की धूप: तेज धूप के इन 4 घंटों में हर 90 मिनट पर लकड़ी के पटेले (दंताली) से ढेरी को उलट-पलट करें। 4 घंटे की धूप से प्राकृतिक रूप से 2% से 2.5% नमी उड़ जाती है।
- पोर्टेबल नमी मीटर से घर पर जांच: मंडी जाने से पहले गांव के किसी प्रगतिशील किसान या नजदीकी कृषि केंद्र के डिजिटल मॉइस्चर मीटर से 3 अलग-अलग बोरियों से नमूना लेकर नमी जांच लें।
3. कांटा पर्ची (J-Form / I-Form) में ये 3 बातें जरूर देखें
अक्सर किसान कांटा पर्ची लिए बिना या बिना पढ़े ही ट्रॉली खाली करके आ जाते हैं। बाद में जब बैंक खाते में पैसा कम आता है, तो पछताना पड़ता है:
1. कुल वजन व काटा गया बारदाना (Tara Weight): सुनिश्चित करें कि खाली ट्रैक्टर-ट्रॉली का वजन सही घटाया गया है और जूट की बोरी का वजन 1 किलो प्रति बोरी से अधिक नहीं काटा गया है।
2. अनधिकृत 'सुखाई' या 'पल्लेदारी' कट: पर्ची पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत शुल्क जैसे "छनाई", "सुखाई", या "कांटा खर्च" नहीं होना चाहिए। यह सारा खर्च सरकार खरीद एजेंसी को सीधे देती है।
3. MSP दर का स्पष्ट अंकन: पर्ची पर स्पष्ट रूप से ₹2,320 प्रति क्विंटल दर्ज होना चाहिए। डिजिटल पर्ची पर तुरंत अपना आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर और बैंक खाता संख्या मिलान करें।
4. बासमती धान (1509, 1718, 1121): क्या दिवाली बाद भाव बढ़ेगा?
जो किसान बासमती किस्मों की खेती करते हैं, उनके लिए स्थिति अलग है। बासमती की सरकारी खरीद नहीं होती, बल्कि यह निजी राइस मिलर्स और निर्यातकों द्वारा खरीदी जाती है। केंद्र सरकार द्वारा बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) पूरी तरह हटाने के बाद खाड़ी देशों और यूरोप से नए ऑर्डर आने शुरू हो गए हैं:
🌾 बासमती बाजार आउटलुक (अक्टूबर अंतिम सप्ताह):
नरेला, तरावड़ी, करनाल और कैथल मंडियों में धान 1509 सूखा माल ₹3,100 से ₹3,350 और धान 1718 कंबाइन ₹3,600 से ₹3,950 प्रति क्विंटल के दायरे में बिक रहा है। व्यापारियों के अनुसार, दिवाली बाद जैसे ही मंडियों में दैनिक आवक का दबाव कम होगा, अच्छे सूखे माल में ₹150 से ₹250 प्रति क्विंटल की और तेजी देखने को मिल सकती है। इसलिए जिन किसानों के पास सुरक्षित भंडारण है, वे सूखा माल रोककर चरणबद्ध तरीके से बेच सकते हैं।




