मध्य प्रदेश (विदिशा, उज्जैन, देवास, सागर, होशंगाबाद), राजस्थान (कोटा, बारां, हनुमानगढ़) और महाराष्ट्र में चने की बुवाई का सबसे अनुकूल समय 25 अक्टूबर से 15 नवंबर आ चुका है। सरकार द्वारा चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर ₹5,650 प्रति क्विंटल किए जाने के बाद किसान अधिक पैदावार वाली किस्मों की तलाश में हैं। लेकिन आज के समय में किसानों के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द है—कटाई के समय मजदूरों की भारी किल्लत और ₹1,500 प्रति बीघा लेबर का खर्च!
RVG 202 बनाम फूले विक्रम: कौन सी किस्म आपके खेत के लिए बेस्ट?
निर्णय लेने से पहले दोनों किस्मों के बुनियादी अंतर को समझें:
| विशेषता | RVG 202 (राज विजया 202) | फूले विक्रम (Phule Vikram) |
|---|---|---|
| पकने की अवधि | 105 से 110 दिन (मध्यम अगेती) | 105 से 112 दिन |
| पौधे की बनावट | फैलावदार, झाड़ीनुमा | सीधा खड़ा (60-65 सेमी ऊंचा) |
| कटाई का तरीका | हाथ से मजदूरी कटाई अनिवार्य | कम्बाईन हार्वेस्टर से सीधी कटाई |
| औसत पैदावार | 18 से 22 क्विंटल/एकड़ | 16 से 20 क्विंटल/एकड़ |
| दाने का आकार व रंग | मोटा बोल्ड दाना, चमकदार बादामी | मध्यम बोल्ड, आकर्षक पीला-भूरा |
| उकठा (Wilt) सहनशीलता | 100% उच्च प्रतिरोधी | उच्च प्रतिरोधी |
फूले विक्रम की सबसे बड़ी क्रांति: लेबर खर्च ₹1,200/बीघा की सीधी बचत
पारंपरिक चने की किस्मों में फलियां जमीन से 5 से 10 सेमी ऊपर ही शुरू हो जाती हैं, जिसके कारण हार्वेस्टर का कटर बार फलियों को काट देता है और 30% दाना खेत में बिखर जाता है। लेकिन महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (राहुरी) द्वारा विकसित 'फूले विक्रम' में पहली फली जमीन से 30 से 35 सेमी ऊपर लगती है। सामान्य गेहूं वाले कम्बाईन हार्वेस्टर से इसे 20 मिनट में बिना किसी नुकसान के काटा जा सकता है। जहां हाथ से कटाई में ₹1,500 प्रति बीघा लगता है, वहीं हार्वेस्टर मात्र ₹400 में काम कर देता है।
उकठा (Fusarium Wilt) से 100% सुरक्षा का वैज्ञानिक बीजोपचार
चने की फसल में 90% नुकसान उकठा (जड़ गलन) रोग के कारण होता है। इससे बचने के लिए बुवाई से पहले एफ.आई.आर. (FIR) नियम अपनाएं:
- F (Fungicide - फफूंदनाशक): प्रति किलो बीज में 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम 12% + मेंकोजेब 63% (साफ) या 5 ग्राम जैविक ट्राइकोडर्मा विरिडी मिलाएं।
- I (Insecticide - कीटनाशक): दीमक व जड़ की लट से बचाव के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 EC (4ml प्रति किलो बीज)।
- R (Rhizobium - कल्चर): 1 एकड़ के बीज में राइजोबियम कल्चर + पीएसबी (PSB) कल्चर का लेप लगाएं। इससे वायुमंडल की नाइट्रोजन जड़ों की गांठों में फिक्स होती है और यूरिया की जरूरत 70% घट जाती है।
⚠️ सिंचाई का सुनहरा नियम: चने की फसल में जब 50% फूल खिल रहे हों, तब कभी भी पानी न लगाएं। फूल के समय सिंचाई करने से सारे फूल गिर जाते हैं और फसल वानस्पतिक वृद्धि (पेड़ बनने) में लग जाती है। पहली सिंचाई पलेवा के बाद केवल घेंटी (पॉड) बनते समय ही करें।




