नवंबर का पहला पखवाड़ा (1 से 20 नवंबर) पूरे उत्तर-पश्चिमी भारत (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान) और मध्य भारत (मध्य प्रदेश व गुजरात) में गेहूं (Wheat) की बुवाई का 'गोल्डन पीरियड' (सर्वोत्तम समय) माना जाता है। केंद्र सरकार द्वारा रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित करने के बाद किसान ऐसी किस्मों की तलाश में हैं जो मार्च की पछुआ लू (टर्मिनल हीट) को भी झेल सकें और कम पानी में 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार दें।
🌾 ICAR-IIWBR करनाल की सिफारिश:
इस साल किसानों के बीच भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR, करनाल) द्वारा विकसित DBW 327 (करण शिवानी), DBW 187 (करण वंदना) और निजी क्षेत्र की सर्वाधिक लोकप्रिय किस्म श्रीराम सुपर 303 सबसे अधिक मांग में हैं। आइए देखें कौन सी किस्म आपके खेत और पानी की उपलब्धता के लिए सबसे सटीक है।
टॉप 3 गेहूं किस्मों की विस्तृत तुलना सारणी (DBW 327 vs DBW 187 vs श्रीराम 303)
| विशेषता / मापदंड | DBW 327 (करण शिवानी) | DBW 187 (करण वंदना) | श्रीराम सुपर 303 |
|---|---|---|---|
| सर्वोत्तम बुवाई समय | 25 अक्टूबर से 15 नवंबर (अगेती) | 5 नवंबर से 25 नवंबर (समय पर) | 1 नवंबर से 30 नवंबर |
| फसल पकने की अवधि | 150 से 155 दिन | 120 से 125 दिन (जल्दी पकने वाली) | 130 से 135 दिन |
| औसत पैदावार (प्रति एकड़) | 30 से 32 क्विंटल | 26 से 28 क्विंटल | 25 से 28 क्विंटल |
| अधिकतम रिकॉर्ड क्षमता | 35 क्विंटल / एकड़ (87.7 q/ha) | 30 क्विंटल / एकड़ | 29 क्विंटल / एकड़ |
| गर्मी व लू सहनशीलता | अत्यधिक उच्च (टर्मिनल हीट टॉलरेंट) | मध्यम से उच्च | मध्यम |
| रोग प्रतिरोधक क्षमता | पीला व भूरा रतुआ प्रतिरोधी | ब्लास्ट व रतुआ रोधी | रतुआ के प्रति सहनशील |
| विशेष पोषण गुण | जिंक व प्रोटीन रिच | बायोफोर्टिफाइड (आयरन 43.1 ppm) | चपाती की उत्तम चमक |
35 क्विंटल पैदावार के 5 वैज्ञानिक नियम (ICAR गाइडलाइन)
- सही बीज दर (Seed Rate): समय पर बुवाई में 40 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज ही डालें। कई किसान 50-60 किलो बीज डाल देते हैं, जिससे पौधे घने होकर कमजोर हो जाते हैं और कल्ले (Tillers) नहीं फूटते।
- बीजोपचार (Seed Treatment) कभी न भूलें: बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज में कार्बेन्डाजिम 50% WP (2.5 ग्राम) या टेबुकोनाज़ोल 2% DS (1.5 ग्राम) से उपचारित करें। दीमक वाले खेतों में थायमेथॉक्सम 30% FS (2 मिली/किग्रा) अवश्य लगाएं।
- पलेवा करके ही बुवाई करें (ओट का नियम): सूखे खेत में बीज डालकर पानी लगाने (कोर बुवाई) से मिट्टी पर सख्त पपड़ी जम जाती है और 25-30% अंकुरण मारा जाता है। खेत में पलेवा करें और जब पैर धंसना बंद हो जाए, तब जुताई करके बीज डालें।
- लाइन से लाइन की दूरी: सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल से 20 से 22 सेंटीमीटर (लगभग 8 इंच) की कतार दूरी और 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर ही बीज गिराएं।
- क्राउन रूट अवस्था (CRI - 21वां दिन) पर पहली सिंचाई: बुवाई के 20 से 22वें दिन जब पौधे की स्थाई जड़ें फूट रही हों, तब पहला हल्का पानी अवश्य दें। इस समय पानी में देरी करने से कल्लों की संख्या 40% तक घट जाती है।
💡 खाद की कमी हो तो क्या करें?
यदि आपके क्षेत्र में DAP नहीं मिल रहा है, तो हमारी विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट पढ़ें: DAP का असली विकल्प 3 बोरी SSP + 20 किलो यूरिया फॉर्मूला। यह फॉर्मूला 1 बोरी DAP से भी अधिक पैदावार देता है।
गेहूं की प्रमुख मंडियों जैसे करनाल गेहूं मंडी, खन्ना मंडी पंजाब व सीहोर शरबती गेहूं मंडी के लाइव भाव जानने के लिए Mandi Bhav Live पर नियमित विजिट करें।




