नवंबर 2026 के शुरुआती कारोबारी सत्रों में देश के प्रमुख तिलहन बाजारों में सरसों (Mustard) की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में 42% कंडीशन सरसों का भाव ₹8,600 से ₹8,800 प्रति क्विंटल और मध्य प्रदेश के चंबल अंचल की मोरेना व श्योपुर मंडियों में भाव ₹8,200 से ₹8,500 प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP ₹5,950) से बाजार भाव लगभग ₹2,500 से ₹2,800 प्रति क्विंटल ऊपर चल रहा है।
📈 मुख्य सवाल: क्या सरसों ₹9,000 का ऐतिहासिक स्तर पार करेगी?
इस समय देश के किसान और स्टॉकिस्ट यह जानना चाहते हैं कि क्या नई फसल आने से पहले सरसों ₹9,000 का जादुई आंकड़ा छू पाएगी, या मौजूदा स्तरों पर मुनाफावसूली करना बेहतर रणनीति है? आइए तेल मिलों की क्रशिंग मांग, आयात शुल्क और सप्लाई चैन का निष्पक्ष विश्लेषण देखें।
आज के प्रमुख सरसों मंडी व तेल मिल भाव (3 नवंबर 2026 ग्राउंड रिपोर्ट)
| मंडी / डिलीवरी सेंटर | कंडीशन / वैरायटी | मॉडल भाव (₹/क्विंटल) | उच्चतम भाव (₹/क्विंटल) | दैनिक रुख |
|---|---|---|---|---|
| जयपुर (बेंचमार्क मंडी) | 42% कंडीशन (जीएसटी पेड) | ₹8,650 | ₹8,800 | ▲ ₹50 मजबूत |
| मोरेना मंडी (मध्य प्रदेश) | बारीक व बोल्ड सरसों | ₹8,250 | ₹8,480 | ▲ ₹75 मजबूत |
| भरतपुर मंडी (राजस्थान) | लोकल अगेती सरसों | ₹8,300 | ₹8,520 | स्थिर |
| अलवर व खैरथल मंडी | 40-42% तेल कंडीशन | ₹8,350 | ₹8,560 | ▲ ₹40 मजबूत |
| कोटा व बारां मंडी | हाड़ौती बोल्ड सरसों | ₹8,150 | ₹8,400 | स्थिर |
सरसों में तेजी के 4 मुख्य जमीनी कारण
- कच्चे पाम तेल व सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क वृद्धि: केंद्र सरकार द्वारा विदेशी खाद्य तेलों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से घरेलू तिलहन और विशेषकर सरसों तेल की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता काफी मजबूत हुई है। घरेलू तेल मिलों को अब विदेशी तेलों के सस्ते डंपिंग का सामना नहीं करना पड़ रहा।
- सरसों तेल के थोक भाव में मजबूती: प्रमुख मिल डिलीवरी केंद्रों पर कच्ची घानी सरसों तेल का भाव ₹170 से ₹185 प्रति किलो (लगभग ₹17,000–₹18,500/क्विंटल) के स्तर पर टिका हुआ है। इससे मिलर्स को क्रशिंग में ₹200 से ₹250 प्रति क्विंटल का सकारात्मक मार्जिन मिल रहा है।
- किसानों व स्टॉकिस्टों के पास सीमित स्टॉक: सरकारी खरीद एजेंसियों (NAFED व HAFED) और बड़े व्यापारियों ने दिवाली से पहले ही अपने स्टॉक का बड़ा हिस्सा निकाल दिया था। अब मंडियों में दैनिक आवक घटकर मात्र 1.5 से 2 लाख बोरी रह गई है।
- नई फसल की आवक में अभी 100 दिन बाकी: रबी 2026-27 की नई सरसों की आवक फरवरी के दूसरे पखवाड़े या मार्च की शुरुआत से पहले मंडियों में नहीं आएगी। अगले 3 महीनों तक मिलों को अपनी दैनिक क्रशिंग आवश्यकता पूरी करने के लिए पुराने माल पर ही निर्भर रहना होगा।
🎯 कृषि अर्थशास्त्रियों की किसानों को सलाह (बेचें या रोकें?)
• किस्तों में बिकवाली करें: यदि आपके पास पुराना स्टॉक पड़ा है, तो एक साथ सारा माल रोकने के बजाय ₹8,600 से ₹8,800 के स्तर पर 40% से 50% माल मंडी में निकाल देना बहुत सुरक्षित रणनीति है।
• ₹9,000 के स्तर तक जयपुर पहुंच सकता है, लेकिन उसके ऊपर मुनाफावसूली का दबाव बढ़ सकता है क्योंकि आयातित सूरजमुखी व सोयाबीन तेल के सौदे भी बाजार में आ रहे हैं।
अन्य प्रमुख मंडियों जैसे कोटा सरसों मंडी, नीमच मंडी व ऑल इंडिया सरसों भाव की दैनिक रिपोर्ट के लिए Mandi Bhav Live के साथ बने रहें।




