हरियाणा (सिरसा, फतेहाबाद, आदमपुर), राजस्थान (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अनूपगढ़), गुजरात (राजकोट, बोटाद) और महाराष्ट्र की कॉटन मंडियों में कपास (नरमा) की नई आवक अपने चरम पर पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मध्यम रेशे के लिए ₹8,267 प्रति क्विंटल और लंबे रेशे के लिए ₹8,667 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। लेकिन किसान इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या दिवाली से पहले माल बेचना सही है या रोक कर रखना?
मंडियों में आज क्या चल रहे हैं वास्तविक दरें?
वर्तमान में उत्तर भारत और मध्य भारत की प्रमुख मंडियों में नरमा की नीलामी दरें इस प्रकार दर्ज की जा रही हैं:
| मंडी / राज्य | औसत भाव (₹/क्विंटल) | उच्चतम भाव (सुपर लॉट) | आवक स्थिति |
|---|---|---|---|
| सिरसा / आदमपुर (हरियाणा) | ₹8,650 - ₹8,850 | ₹9,120 | 12,000 क्विंटल/दिन |
| श्रीगंगानगर / गोलूवाला (राजस्थान) | ₹8,700 - ₹8,900 | ₹9,180 | 15,000 क्विंटल/दिन |
| राजकोट / बोटाद (गुजरात) | ₹8,800 - ₹9,050 | ₹9,260 | 22,000 क्विंटल/दिन |
| अकोला / यवतमाल (महाराष्ट्र) | ₹8,500 - ₹8,750 | ₹8,950 | 10,000 क्विंटल/दिन |
8% से 12% नमी का खेल: कांटा पर्ची पर किसान कैसे लुटते हैं?
भारतीय कपास निगम (CCI) और निजी जिनिंग मिलों के खरीद नियमों को हर किसान को समझना चाहिए:
- बेस मानक 8% नमी: यदि आपके नरमा में 8% या उससे कम नमी है, तो आपको सरकार का पूरा MSP (₹8,667) या मंडी की पूरी बोली दर मिलती है।
- 8% से 12% नमी पर कटौती: 8% से ऊपर प्रति 1% नमी बढ़ने पर भाव में से 1% राशि काट ली जाती है (यानी ₹86 प्रति क्विंटल की कटौती)। 12% नमी होने पर सीधे ₹340 प्रति क्विंटल कट जाते हैं।
- 12% से अधिक नमी होने पर रिजेक्ट: सरकारी CCI कांटे 12% से अधिक नमी वाला माल खरीदने से सीधे मना कर देते हैं, जिसका फायदा उठाकर लोकल व्यापारी ओने-पौने दामों में बोली लगाते हैं।
💡 किसान के लिए सलाह: खेत से चुनकर लाते ही नरमा सीधे मंडी न ले जाएं। उसे पक्के फर्श या तिरपाल पर 1 दिन की धूप जरूर दिखाएं। धूप लगने से नमी 11-12% से घटकर 8-9% पर आ जाती है, जिससे आपकी ट्रॉली पर ₹1,500 से ₹2,500 का सीधा फायदा होता है।
बाजार का भविष्य: क्या दिवाली बाद नरमा ₹9,500 पार जाएगा?
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) और प्रमुख जिनिंग मिलर्स के अनुसार इस साल गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) और बेमौसम बारिश के कारण शीर्ष गुणवत्ता वाले चमकीले नरमा का उत्पादन लगभग 10-12% कम रहने का अनुमान है। दिवाली के त्योहारी सीजन में मंडियां 4 से 6 दिन बंद रहेंगी। छुट्टियों के बाद जब टेक्सटाइल मिलों में धागे की मांग निकलेगी और दैनिक आवक का दबाव घटेगा, तब सफेद, लंबे रेशे वाले सुपर नरमा के भाव में ₹300 से ₹500 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त उछाल देखने को मिल सकता है।




