देश की सबसे बड़ी लहसुन मंडी नीमच और मंदसौर (मध्य प्रदेश) में लहसुन के दामों ने इतिहास के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सोमवार को नीमच मंडी में प्रीमियम क्वालिटी का एक्सपोर्ट बॉक्स लहसुन ₹34,000 से ₹36,200 प्रति क्विंटल के अभूतपूर्व स्तर पर बिका, जबकि एवरेज लड्डू माल भी ₹20,000 से ₹25,000 प्रति क्विंटल के पार बना हुआ है। अब देश भर के किसानों और व्यापारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिवाली के बाद यह भाव ₹40,000 का जादुई आंकड़ा पार करेगा या बाजार में मुनाफावसूली आएगी?
📊 कोल्ड स्टोरेज ग्राउंड ऑडिट (अक्टूबर अंतिम सप्ताह): मध्य प्रदेश (नीमच, मंदसौर, इंदौर, रतलाम) और गुजरात के कोल्ड स्टोरेज में अब केवल 12% से 15% स्टॉक शेष बचा है। 85% से अधिक माल पहले ही निकल चुका है। आपूर्ति की यह भारी कमी ही वर्तमान में कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनाए हुए है।
🚢 क्या ₹40,000 का स्तर संभव है? व्यापारियों की राय
नीमच मंडी के वरिष्ठ मसाला व्यापारियों के अनुसार, दिवाली अवकाश (29 अक्टूबर से 3 नवंबर) के बाद जब मंडियां खुलेंगी, तो पाइपलाइन खाली होने के कारण मांग में भारी उछाल रहेगा। इसके मुख्य कारक:
- शादियों का सीजन: नवंबर के मध्य से शुरू हो रहे देवउठनी एकादशी के वैवाहिक सीजन के चलते होटल, कैटरिंग और मसाला प्रोसेसिंग प्लांट्स से भारी आर्डर आ रहे हैं।
- नई फसल में देरी: उत्तर भारत की नई देसी लहसुन की फसल फरवरी-मार्च 2027 से पहले नहीं आएगी।
- दक्षिण भारत (ऊंटी) आवक: कर्नाटक और तमिलनाडु की नई ऊंटी लहसुन की सीमित आवक दिसंबर के प्रथम सप्ताह में शुरू होगी, जिसका शुरुआती भाव भी ₹200 से ₹250 प्रति किलो से कम रहने की उम्मीद नहीं है।
🌾 किसानों के लिए अनुशंसित बिकवाली रणनीति
कृषि विश्लेषकों की सलाह है कि किसान भाई किसी एकतरफा तेजी के लालच में पूरा माल रोककर न रखें। 'चरणबद्ध बिकवाली' (Phased Selling) अपनाएं: अपने बचे हुए स्टॉक का 30% हिस्सा दिवाली से पहले निकालें, 40% हिस्सा दिवाली बाद नवंबर के पहले पखवाड़े में और 30% स्टॉक दिसंबर की संभावित तेजी के लिए सुरक्षित रखें। इससे बाजार में किसी अप्रत्याशित गिरावट का जोखिम शून्य हो जाता है।




