देश की प्रमुख तिलहन मंडियों (जयपुर, भरतपुर, अलवर, कोटा, दिल्ली और आगरा) में इस समय सरसों (Mustard) के भाव ₹5,950 से ₹6,450 प्रति क्विंटल (42% कंडीशन) के दायरे में मजबूत बने हुए हैं। रबी बुवाई के इस पीक सीजन में देश भर के किसानों और व्यापारियों की निगाहें सिर्फ एक ही सवाल पर टिकी हैं: "क्या दिवाली अवकाश के बाद सर्दियों में सरसों का भाव ₹6,800 से ₹7,000 का स्तर पार करेगा या नई आवक के दबाव में बाजार स्थिर रहेगा?" सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) और तेल मिलों के आंकड़ों के विश्लेषण से बाजार का स्पष्ट रुख सामने आ रहा है।
⚡ 3 बड़े तेजी कारक जो सरसों को सहारा दे रहे हैं:
1. कच्चे पाम तेल (CPO) पर 20% आयात शुल्क वृद्धि: विदेशी सस्ते तेल का आयात महंगा होने से घरेलू सरसों तेल की मांग में 15% का उछाल आया है।
2. त्योहारी व वैवाहिक मांग: दिवाली से लेकर देवउठनी ग्यारस तक मिठाई निर्माताओं और नमकीन इंडस्ट्री द्वारा शुद्ध सरसों तेल की भारी खपत।
3. स्टॉकिस्टों के पास सीमित माल: नेफेड (NAFED) का पुराना स्टॉक लगभग साफ हो चुका है और निजी व्यापारियों के पास सीमित इन्वेंटरी है।
🏭 तेल मिलों और प्लांटों का वर्तमान खरीद रुख
जयपुर में 42% कंडीशन सरसों की डिलीवरी दर ₹6,425 से ₹6,450 प्रति क्विंटल बोली जा रही है, जबकि सलोनी प्लांट (आगरा/कोटा/अलवर) की खरीद दरें ₹6,750 से ₹6,800 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं। तेल मिलर्स के अनुसार, सर्दियों (नवंबर से जनवरी) में उत्तर भारत में सरसों तेल की खपत अपने उच्चतम स्तर पर होती है। वर्तमान में दैनिक आवक मात्र 1.5 से 2 लाख बोरी के बीच सिमटी हुई है, जिससे पेराई मिलों को अपनी दैनिक क्षमता चलाने के लिए ऊंचे दामों पर माल खरीदना पड़ रहा है।
🌾 क्या नई बुवाई का रकबा कीमतों को रोकेगा?
कृषि मंत्रालय के प्रारंभिक बुवाई आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष राजस्थान और मध्य प्रदेश में सरसों की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4% से 6% बढ़ने का अनुमान है क्योंकि किसानों को कपास और सोयाबीन की तुलना में सरसों में बेहतर मुनाफा दिख रहा है। हालांकि, नई फसल की आवक फरवरी 2027 के मध्य से पहले शुरू नहीं होगी। यानी आगामी 90 दिनों तक बाजार पूरी तरह पुराने स्टॉक और दैनिक पेराई मांग के सहारे ही चलेगा।
🎯 किसानों के लिए स्मार्ट बिकवाली फॉर्मूला (Phase-wise Exit)
बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि यदि आपके पास अच्छी सूखी सरसों (8% से कम नमी) रखी है, तो एकमुश्त सारा माल बेचने के बजाय चरणबद्ध रणनीति अपनाएं:
- पहला चरण (40% माल): दिवाली के तुरंत बाद नवंबर प्रथम सप्ताह में जब भाव ₹6,400 से ₹6,600 के बीच मिले, तो 40% स्टॉक बेचकर रबी खाद-बीज का खर्च निकालें।
- दूसरा चरण (40% माल): दिसंबर के कड़ाके की ठंड वाले दिनों में जब तेल मांग चरम पर होगी और भाव ₹6,700–₹6,900 के आसपास पहुंचे, तब 40% माल निकालें।
- तीसरा चरण (20% माल): जनवरी के अंत तक यदि कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय उछाल आए, तो बचे हुए 20% माल को ऊंचे स्तरों पर भुनाएं।




